कुछ कोरे सफहे निकाले कि शायद इक नज़्म लिखूं,
सालों पहले साथ गुज़ारी जाड़ों की वो बज़्म लिखूं.
शायद उस नाज़-ओ-हयात में लिपटी इक ग़ज़ल लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं, इश्क-ए-अज़ल लिखूं.
गर्म साँसों से सिके वो गुलाबी रुखसार लिखूं,
किसी सुबह की अलसाई सैर का बाग़-ए-गुलज़ार लिखूं.
मुमकिन है इक शरारत के ख़ास-ओ-अंदाज़ लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं वो हँसते साज़ लिखूं.
हमकदम हो पहुंचे कुछ मंज़िल-ओ-मुक़ाम लिखूं,
हमसफ़र हो गुज़रे जो वो राह-ए-तमाम लिखूं.
कोशिश करूँ के चंद छलके आब-ओ-शार लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं, इंतज़ार लिखूं.
हर आह पे धड़कता ये दिल-ए-नादाँ लिखूं,
मुझ मुन्तज़िर पे किया इक हसीं एहसाँ लिखूं.
जानता नहीं क्या आग़ाज़, क्या अंजाम लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं, सिर्फ तुम्हारा नाम लिखूं.
सफहे- pages/ leaves of paper ; नज़्म- a poetic verse ; बज़्म- a musical evening, a 'mehfil' ; नाज़- grace ; हयात- shyness/blushing ; अज़ल- eternal ; रुखसार- cheeks ; अलसाई- lazy ; गुलज़ार- garden of flowers ; मुक़ाम- destination ; तमाम- all/ in completion ; आब-ओ-शार- water springs, here it's a metaphor for tears ; मुन्तज़िर- one who has waited ; आग़ाज़- beginning ; अंजाम- end
सालों पहले साथ गुज़ारी जाड़ों की वो बज़्म लिखूं.
शायद उस नाज़-ओ-हयात में लिपटी इक ग़ज़ल लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं, इश्क-ए-अज़ल लिखूं.
गर्म साँसों से सिके वो गुलाबी रुखसार लिखूं,
किसी सुबह की अलसाई सैर का बाग़-ए-गुलज़ार लिखूं.
मुमकिन है इक शरारत के ख़ास-ओ-अंदाज़ लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं वो हँसते साज़ लिखूं.
हमकदम हो पहुंचे कुछ मंज़िल-ओ-मुक़ाम लिखूं,
हमसफ़र हो गुज़रे जो वो राह-ए-तमाम लिखूं.
कोशिश करूँ के चंद छलके आब-ओ-शार लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं, इंतज़ार लिखूं.
हर आह पे धड़कता ये दिल-ए-नादाँ लिखूं,
मुझ मुन्तज़िर पे किया इक हसीं एहसाँ लिखूं.
जानता नहीं क्या आग़ाज़, क्या अंजाम लिखूं,
सोचता हूँ इन सफहों पे आज मैं, सिर्फ तुम्हारा नाम लिखूं.
सफहे- pages/ leaves of paper ; नज़्म- a poetic verse ; बज़्म- a musical evening, a 'mehfil' ; नाज़- grace ; हयात- shyness/blushing ; अज़ल- eternal ; रुखसार- cheeks ; अलसाई- lazy ; गुलज़ार- garden of flowers ; मुक़ाम- destination ; तमाम- all/ in completion ; आब-ओ-शार- water springs, here it's a metaphor for tears ; मुन्तज़िर- one who has waited ; आग़ाज़- beginning ; अंजाम- end