हवादार बालकॉनी ,
पत्तों की सरसराहट,
रात की स्याही पर ,
बादलों में पोशीदा ,
गोल दूधिया चाँद।
है फुर्सत की दावत।
मगर इस मसरूफियत के चलते ,
फुर्सत भी हमारी हीरा हो गयी है।
पत्तों की सरसराहट,
रात की स्याही पर ,
बादलों में पोशीदा ,
गोल दूधिया चाँद।
है फुर्सत की दावत।
मगर इस मसरूफियत के चलते ,
फुर्सत भी हमारी हीरा हो गयी है।
2 comments:
Arre wahh...bahot sundar...'Fursat bhi heera ho gayi hai!"
Nice
Fursat bhi heera ho gayi hai... waah waah !!!
Post a Comment