नंगे पाँव, फटी एड़ियां
तलवों से उड़ती
कपड़ों पर सनी
सूखी, प्यासी
पीली धुल।
मैं, मगर
दौड़ना नहीं छोड़ूंगा।
धुप में चुन्धियाई आँखें,
रूकती थकती सांस,
ख़त्म होता पसीना,
ज़ख्मों पर जमा
सूखा काला खून।
मैं फिर भी,
दौड़ना नहीं छोड़ूंगा।
झल्लाया मन,
टूटता हौसला,
गुज़रती उम्र,
नाउम्मीदी की हद छूता
थका हुआ दिल।
मैं अब भी मगर,
दौड़ना नहीं छोड़ूंगा।
क्योंकि,
इस रेगिस्तान की
सूखी दौड़ के पार-
कहीं पानी बरसता है।
तलवों से उड़ती
कपड़ों पर सनी
सूखी, प्यासी
पीली धुल।
मैं, मगर
दौड़ना नहीं छोड़ूंगा।
धुप में चुन्धियाई आँखें,
रूकती थकती सांस,
ख़त्म होता पसीना,
ज़ख्मों पर जमा
सूखा काला खून।
मैं फिर भी,
दौड़ना नहीं छोड़ूंगा।
झल्लाया मन,
टूटता हौसला,
गुज़रती उम्र,
नाउम्मीदी की हद छूता
थका हुआ दिल।
मैं अब भी मगर,
दौड़ना नहीं छोड़ूंगा।
क्योंकि,
इस रेगिस्तान की
सूखी दौड़ के पार-
कहीं पानी बरसता है।
4 comments:
nice...
what motivated you to write this?
deep
touching
Keep it up !
Nice. I liked the last line the best. But please do fix the spelling errors.
Manish
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