It was an extremely hot Ahmedabadi summer day. I was chatting with a friend yearning for the first rains to come. And she typed- " जल्द ही फुहारें आएँगी ...." that started a flow of lines and this is what emerged. :)
अब जल्द ही फुहारें आएँगी ....
गगन श्याम हो जाएगा,
पवन तीव्र हो जाएगी,
मोर करेंगे नृत्य और,
सुगंध धरा से आएगी,
मेघनाद की गुँजन के बीच,
िकरणें भी िवलीन हो जाएंगी,
िफर माँ के गंगाजल की िछडकन जैसी,
चंचल शीतल बूँदें बरस जाएंगी
अब जल्द ही फुहारें आएँगी ....
अब जल्द ही फुहारें आएँगी ....
गगन श्याम हो जाएगा,
पवन तीव्र हो जाएगी,
मोर करेंगे नृत्य और,
सुगंध धरा से आएगी,
मेघनाद की गुँजन के बीच,
िकरणें भी िवलीन हो जाएंगी,
िफर माँ के गंगाजल की िछडकन जैसी,
चंचल शीतल बूँदें बरस जाएंगी
अब जल्द ही फुहारें आएँगी ....
2 comments:
how we all yearn for the rains!!!!
good 1..
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